इश्क का इज़हार
इश्क़ का इज़हार करते हो
गुलशन बहार करते हो
अगर फ़िर वो बोल दे हां
तो ना जाने क्या क्या करते हो
चाहे वो तेरी दुनिया से
रुक्सत क्यों ना हो जाए
क्यों तुम उसी से प्यार करते हो
ये दुनिया को ज़ालिम बताना छोर दे,
छोर दे ये सारी मोह माया को जंजाल
उस ज़ालिम को तुम ख़ुद में ही
क्यों नहीं ढूंढा करती हो
शायद तेरा कुछ रिश्ता है
उस ज़ालिम के साथ
तो रिश्ते क्यों नहीं
निभाया करते हो
गुलशन बहार करते हो
अगर फ़िर वो बोल दे हां
तो ना जाने क्या क्या करते हो
चाहे वो तेरी दुनिया से
रुक्सत क्यों ना हो जाए
क्यों तुम उसी से प्यार करते हो
ये दुनिया को ज़ालिम बताना छोर दे,
छोर दे ये सारी मोह माया को जंजाल
उस ज़ालिम को तुम ख़ुद में ही
क्यों नहीं ढूंढा करती हो
शायद तेरा कुछ रिश्ता है
उस ज़ालिम के साथ
तो रिश्ते क्यों नहीं
निभाया करते हो
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